Gold Silver Price Drop News: सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट क्यों आई? जानें ताज़ा अपडेट

Gold Silver Price Drop News: सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट

हाल के दिनों में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अब सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ भारतीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। इस गिरावट ने निवेशकों और सर्राफा बाजार दोनों का ध्यान खींचा है।
इस लेख में हम जानेंगे कि सोना-चांदी के दाम क्यों गिरे, भारत में ताज़ा भाव क्या हैं और आगे बाजार का रुख कैसा रह सकता है।

सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजहें

1. अंतरराष्ट्रीय तनाव में कमी

जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) से दूरी बनाने लगते हैं। इसका सीधा असर सोने और चांदी की मांग पर पड़ता है।

2. डॉलर की मजबूती

अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव आता है। डॉलर मजबूत होने पर निवेशक दूसरी संपत्तियों की ओर रुख करते हैं।

3. मुनाफावसूली (Profit Booking)

हाल ही में सोना और चांदी ने नए रिकॉर्ड बनाए थे। ऐसे में कई निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू किया, जिससे कीमतों में अचानक गिरावट आई।

4. ETF और फ्यूचर्स मार्केट में बिकवाली

रिपोर्ट्स के अनुसार Silver ETF और फ्यूचर्स सेगमेंट में भारी बिकवाली देखने को मिली है। इसका असर सीधे चांदी की कीमतों पर पड़ा।

भारत में Gold–Silver के ताज़ा भाव (MCX)

भारतीय बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई है:
सोना (24 कैरेट): लगभग ₹1.53–1.54 लाख प्रति 10 ग्राम
चांदी: लगभग ₹3.16–3.19 लाख प्रति किलोग्राम
(भाव बाजार के अनुसार बदल सकते हैं)

क्या यह गिरावट लंबे समय तक रहेगी?

विशेषज्ञों के अनुसार:
यह गिरावट short-term correction हो सकती है
लंबी अवधि में सोना-चांदी अब भी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं
वैश्विक आर्थिक संकेत और ब्याज दरों का फैसला आगे की दिशा तय करेगा
इसलिए निवेशकों को जल्दबाज़ी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचने की सलाह दी जाती है।

निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो सकती है?

अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराएं नहीं
लंबी अवधि के निवेशक SIP या चरणबद्ध निवेश पर ध्यान दे सकते हैं
बाजार से जुड़ी आधिकारिक खबरों पर नजर रखें


निष्कर्ष

Gold Silver Price Drop News फिलहाल बाजार में चर्चा का विषय है। यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक संकेतों, डॉलर की मजबूती और मुनाफावसूली के कारण आई है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अस्थायी सुधार हो सकता है और भविष्य में बाजार की दिशा आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

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